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Thursday, 8 July 2021

कितने प्रश्न करुॅ - ममता कालिया राम का चरित्र चित्रण

 Eknath Patil

S. Y. B. A.  ,  HINDI  ,  paper no - 06  , semester - 04  , 

कितने प्रश्न करुॅ  - ममता कालिया   राम का चरित्र चित्रण :


प्रस्तुत खंडकाव्य में सीता का चरित्र ही मुख्य है। बाकी सारे चरित्र सीता की व्यथा और उनके विद्रोही रूप को ठोस और गहरा बनाने के लिए खंडकाव्य में चित्रित है।                  1) दूसरा प्रमुख पात्र :


प्रस्तुत खंडकाव्य में राम सिर्फ एक बार अपनी पूर्व धारणा और अपनी उसी पुरानी अटल निश्चयात्मकता के साथ उपस्थित होते हैं। इसके पहले राम का सारा चरित्र सीता की मनःस्थिती के माध्यम से हमारे सामने आता है। परंतु खंडकाव्य के प्रत्येक प्रसंग का संबंध प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से राम के साथ जुड़ा हुआ है।


(2) शूरवीर :


प्रस्तुत खंडकाव्य में राम शूरवीर महापराक्रमी राजा के रूप में चित्रित है। जनक राजा द्वारा आयोजित सीता के स्वयंवर में अनेक वीर भूपति सम्मिलित होते हैं। कोई भी महाकाय शिवधनुष्य को उठा नहीं पाते तभी अयोध्या के राजकुमार राम का आगमन होता है। राम भरी सभा में महाकाय शिवधनुष्य उठाकर धराशायी करा देता है -


जब भरी सभा में उठकर अकस्मात ही तुमने


दो टूक धराशायी कर दिया धनुष्य शिव


बनवास के समय अनेक असुरों का संहार करते हुए राम लंका पहुँचते है। राम और रावण के बीच घमासान


युद्ध होता है। राम अपने शक्ति के बल पर रावण का संहार कर देते हैं। लंका पर विजय प्राप्त करके सीता को वापस अयोध्या ले आते हैं। प्रस्तुत खंडकाव्य में राम का चरित्र वाल्मिकी कृत 'रामायण' तथा तुलसीदास कृत 'रामचरितमानस' की


3) मर्यादा पुरुषोत्तम राम :


तहमा पुरुषोत्तम के रूप में चित्रित है। खंडकाव्य में विवाह, अपहरण, अग्निपरीक्षा, निर्वासन और पृथ्वीप्रवेश इनमें से किसी प्रसंग में अपनी मर्यादाओं को लांघते हुए दिखाई नहीं देते।                          4) लोकनिर्णय का सम्मान करनेवाला राजा :


राजा राम अपने परिजनों से भी प्रजा के बारे में अधिक चिंतित दिखाई देते हैं। राजाराम लोकहितैषी उदात्त राजा के रूप में चित्रित है। लोकनिर्णय का सदा सम्मान करना उनकी विशेषता है। वे मर्यादा पुरुषोत्तम है। प्रजा दद्वारा शंका उपस्थित होने पर अपनी जीवनसंगीनी प्रिय पत्नी सीता का भी निर्वासन करते हैं। अगर राम चाह तो संशय व्यक्त करनेवालों को कड़ी से कड़ी सजा दे सकते थे। परंतु राम ऐसा नहीं करते क्योंकि उन्हें प्र -पत्नी से भी प्रजा महत्त्वपूर्ण है।               5 . अनिष्ठ निवारक :


वाल्मिकी 'रामायण' या तुलसी कृत 'रामचरितमानस' हो इनमें राम अनिष्ट निवारक के रूप में चित्रित हैं। विवेच्य खंडकाव्य में भी राम अनिष्ट निवारक महान राजा के रूप में चित्रित है। बनवास के समय अनेक अ का वध करके ऋषि मुनियों के संकटों को दूर करते हैं। महापराक्रमी असुरों के राजा लंकापति रावण का वध करके उनके भाई विभिषण को लंका का राजा बनाते हैं।


(6) एक आदर्श राजा :


विवेच्य खंडकाव्य में सीता का चरित्र प्रमुख है। राम का चरित्र सीता की व्यथा और उनके विद्रोह को ठोस बनाने के लिए चित्रित है। परंतु राम का चरित्र अपने आप में विशेष महत्व रखता है। वे एक आदर्श लोकहितैषी राजा के रूप में चित्रित है। प्रजा भी उनका सम्मान करती है। अयोध्या के राजा दशरथ राम को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे। परंतु कैकेयी को दिए वचन निभाते हैं। राम को चौदह साल का बनवास सुनाते हैं। राम पिता के आदेश का पालन करते हुए चौदह साल बनवास के लिए निकल पड़ते हैं। विवेच्य खंडकाव्य में राम मर्यादा पुरुषोत्तम राजा के रूप में चित्रित है। प्रस्तुत खंडकाव्य में राम एक आदर्श पुत्र, आदर्श राजा, आदर्श मित्र, आदर्श भाई आदि गुणों के रूप में चित्रित हुए हैं।


अतः प्रस्तुत खंडकाव्य में राम दूसरा प्रमुख पात्र है। राम शूरवीर धीरोदात्त, महापराक्रमी, मर्यादा पुरुषोत्तम लोकनिर्णय का सम्मान करनेवाला, अनिष्ठ निवारक एक आदर्श राजा के रूप में चित्रित है।                              3. वाल्मिकी का चरित्र चित्रण :


वाल्मिकी प्रस्तुत खंडकाव्य का महत्त्वपूर्ण चरित्र है। निर्वासन के समय लक्ष्मण सीता को तमसा के किनारे छोड़कर वापस लौटते हैं। रोती कलपती सीता जल-समाधि लेने के बारे में सोचती है। लेकिन उनके भीतर बैठी हुई माँ उन्हें इस आत्मघात से बचाती है। इसमें ऋषि कवि वाल्मिकी भी सहायक होते हैं। बेबस, बेकसुर सीता को वाल्मिकी सहारा देते हैं। उसके 'संरक्षक' बनकर खड़े होते हैं। वे सिर्फ सीता को शरण ही नहीं देते बल्कि सीता के बच्चों का परिपालक भी बनते हैं। बच्चों को अच्छी शिक्षा देते हैं। युद्ध विद्या में उन्हें निपुण बनाते हैं। इसके अलावा वे रामकथा के रचियता है। सीता वाल्मिकी ऋषि के आश्रम एक साधारण स्त्री की तरह रहने लगती है। अपने जुड़वाँ पुत्रों की सेवा शुश्रूषा में अपनी जिंदगी गुजार देना अब अपनी नियति समझने लगती है। वे लव-कुश को युद्ध विद्या के साथ-साथ रामायण के गायन में पारंगत करते हैं। तभी राम के अश्वमेध यज्ञ में सम्मिलित होने के लिए ऋषि वाल्मिकी को निमंत्रण आता है और वे दोनों बालकों को लेकर यज्ञभूमि में पहुँचते हैं। शत्रुघ्न और साक्षात् वाल्मिकी के मुख से राम को पता चलता है कि सीता जीवित है और वह वाल्मिकी के आश्रम में रह रही है। राम गुरूजनों और ऋषियों से चर्चा करके सीता को पुनः वापस लेने का अपना निर्णय वाल्मिकी को सुनाते हैं और उन्हें इसके लिए राजी कर देते हैं। इससे भी आगे वे राम और सीता के पुनर्मिलन में मध्यस्थ की भूमिका भी अदा करते हैं। इस रूप में बाल्मिकी की मध्यस्थ बड़ी महत्त्वपूर्ण है।वे राम के निर्णय को उचित भी ठहराते हैं। सीता के सारे तर्कों के बावजूद उन्हें राम के निर्णयों में पूरी आस्था है। वे राम द्वारा दिए गए निर्वासन को भी राजा और प्रजा के संबंधों के लिए उचित ठहराते हैं। लेकिन राम के निर्णयों को उचित ठहराते हुए भी वे सीता के ऊपर अपने विचार नहीं लादते बल्कि उन्हें निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र छोड़ देते हैं। यही नहीं शपथ ग्रहण के सार्वजनिक समारोह में वे सीता की निष्कलंकता के पक्ष में अपना सीधा-सादा किंतु प्रबल तर्क देते हैं। इस प्रकार प्रस्तुत खंडकाव्य में समन्वयकारी चरित्र के रूप में कवयित्री ने हमारे सामने वाल्मिकी को प्रस्तुत किया है।

कितने प्रश्न करुॅ / सीता का चरित्र चित्रण

 Eknath Patil

S.Y.B.A. , HINDI  , paper no - 06 , semester  - 04  ,        

 कितने प्रश्न करुॅ  / सीता का चरित्र चित्रण :


चरित्र-चित्रण खंडकाव्य का दूसरा मुख्य तत्त्व है। खंडकाव्य का आकार महाकाव्य की तुलना में छोटा होता है। परिणामतः खंडकाव्य में पात्रों की संख्या सीमित होती है। इसमें चरित्र का विकास भी उतना ही होता है जितना कथावस्तु के विकास में आवश्यक हो। खंडकाव्य में महाकाव्य की तरह मुख्य और गौण पात्रों की योजना की जाती है। प्रस्तुत खंडकाव्य नायिका प्रधान है। इसमें सीता, राम, हनुमान, वाल्मिकी आदि प्रमुख पात्र है। रावण खलनायक के रूप में चित्रित है। सीता के चरित्र की चारित्रिक विशेषताएँ निम्न हैं -


1) नायिका :


सीता प्रस्तुत खंडकाव्य की नायिका है। प्रस्तुत खंडकाव्य सीता के चरित्र को केंद्र में रखकर लिखा गया है। सीता केंद्रीय पात्र है। खंडकाव्य के विवाह प्रसंग से लेकर पृथ्वी प्रवेश की घटना तक के सभी प्रसंगों का संबंध प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से सीता के साथ जुड़ा है। प्रस्तुत खंडकाव्य में सीता का चरित्र पूरी राम कथा में कई तरह के सवाल उठाता है। उन्हीं सवालों को कथा से जोड़कर देखा गया है। अतः सीता प्रस्तुत खंडकाव्य की नायिका के रूप में चित्रित है।


2) निष्कलंक नारी :


प्रस्तुत खंडकाव्य में सीता का चरित्र निष्कलंकित नारी के रूप में चित्रित है। प्रजा द्वारा शंका उपस्थित होने पर निर्दोष सीता को जंगल में छोड़ दिया जाता है। अशोक वाटिका में लंकापति रावण सीता को अनेक प्रलोभन दिखाता है। अनेक यातनाएँ देता है। फिर भी सीता अपने आप को पतिव्रता एवं निष्कलुष रखती है। जब लंका विजय के बाद लंका वापस लौटती है तो उसे अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ता है। तब भी वह निष्कलंक साबित होती है।


3) राम के प्रति आकृष्ट


धनुष्य भंग का प्रसंग राम के प्रति सीता की गहरी स्नेह अनुरक्ति का प्रतीक है.


लज्जा से नत आँखे थी


देखा मैंने कारों से।


या कितना भिन्न तुम्हारा


व्यक्तित्व वहाँ औरों से।


प्रेम और गहरी अनुरक्ति का यह प्रसंग राम की अद्वितीयता से जुड़ा हुआ है। प्रस्तुत खंडकाव्य में राम अपने सौंदर्य, शौर्य, अपने कर्मों और निर्णयों में अद्वितीय है। अतः सीता धनुष्य भंग प्रसंग से ही राम के आकृष्ट है।


4) हर घडी पति का साथ देनेवाली :


विवेच्य खंडकाव्य में नायिका सीता संकट के समय सायें की तरह राम का साथ देती है। शिवधनुष्य उठाते राम के प्रथम दर्शन से लेकर बनवास तक के हर सुख-दुःख की घड़ी में राम के साथ खड़ी रहती है। वह राम के आदेशों का पालन करती है। राजमहल में पली बडी सीता चौदह साल तक अनेक संकटों का सामना करती है। नवविवाहित सीता पति राम के साथ बनवास के लिए निकल पड़ती है। लंका में अनेक संकटों का सामना करती है। किसी सामान्य प्रजा के द्वारा चरित्र पर उँगली उठाने पर वह राम के आदेशों का पालन करती है। अग्निपरीक्षा देती है।


5) दृढ संकल्पी :


सीता दृढ संकल्पी है। अशोक वाटिका में रावण सीता को अनेक यातनाएँ देता है। सीता हर संकट का डटकर मुकाबला करती है। रावण द्वारा अनेक लालच दिखाए जाते हैं। वह स्वयं अशोकवाटिका में आकर साम, दाम, दंड, भेद से सीता की राम के प्रति अटल भक्ति को खंडित करना चाहता है और फिर आत्मसमर्पण के लिए विवश करने का प्रयत्न करता है। परंतु सीता के दृढ संकल्प से राक्षस नारियाँ भी पिघल जाती है। रावण के षडयंत्र का पर्दाफाश करती है।                       6 ) पतिव्रता :


प्रस्तुत खंडकाव्य में सीता का चरित्र पतिव्रता नारी का प्रतिनिधित्व करता है। अनेक संकटों एवं प्रलोभनों के बावजूद भी सीता में पतिव्रता की कोई कमी नहीं है। सीता अगर चाहती तो हनुमान के साथ वापस लौट सकती थी। और पलभर में रावण के सारे खेल मिट्टी में मिला सकती थी। हनुमान राम के परमप्रिय भक्त और अनुगामी थे। वह बहुत सोच-विचार करके हनुमान के प्रस्ताव को अस्वीकार कर देती हैं। इस संबंध में भी उनका मुख्य तर्क राम के प्रति उनकी पति-भक्ति ही है -


“फिर पतिव्रता नारी का


पति के अतिरिक्त किसी के, संग जाना उचित नहीं था,


विपरित काल हो चाहे।"


धनुष्य भंग के समय उसने राम का जो भी रूप देखा था उसके संदर्भ में स्त्री ज्ञान के नाते उनके मन में यह बात जरूर होती कि स्वयं राम उन्हें अपहरण से मुक्त करें।


7) विद्रोही नारी :


विवेच्य खंडकाव्य में सीता का विद्रोही रूप चित्रित है। राम रावण का संहार करके सीता की लंका की कारागृह मुक्ति करते हैं। इस घटना से सीता बेहद खुश होती है। मन में अनेक सपने सजाए हुई थी। तभी से उसके सामने अग्निपरीक्षा का प्रस्ताव रखा जाता है। इस प्रस्ताव से सीता खिन्न हो जाती है। वह मन ही मन कहती हैं, लंका में अनेक संकटों का सामना करने के बावजूद भी शाश्वत पतिव्रत का कवच बनाया। फिर भी अग्निपरीक्षा का प्रस्ताव मेरे सामने रखा गया। सीता मन ही मन कहती है -


"क्या महाबली मारूती ने नहीं बताया ?


Eknath Patil, [07.07.21 12:02]

तुमको था मैंने शाश्वत पतिव्रत


लंका में कवच बनाया।


8) आत्मविश्वास से परिपूर्ण :


अग्निपरीक्षा के प्रस्ताव से सीता खिन्न होती है। अपने मन की आंतरिक दृढ़ता और आत्म-विश्वास से वे उसे स्वीकार करती है। क्योंकि सीता को अपनी निष्कलुषता पर अटल विश्वास है। अग्निपरीक्षा में वह निष्कलंक साबित होती है। इस प्रसंग में देवता भी उसके पतिव्रता रूप का गायन करते हैं। अशोक वाटिका में रावण अनेक प्रलोभन दिखाता है। सीता अनेक संकटों का सामना करती है। उसे दृढ विश्वास है कि श्री राम उसे इस संकट से बाहर निकालेंगे।

9) निर्वासित नारी :


प्रस्तुत खंडकाव्य में सीता निर्वासित है। वह निर्वासन का विरोध नहीं कर पाती क्योंकि वह अकेली है। प्रजा, सम्राट तथा परिवार का कोई भी सदस्य उनकी ओर से बोलने के लिए तैयार नहीं है। राम शूरवीर लोकहितैषी उदात्त राजा है। लोकादर्श उनके साथ होने के बावजूद भी करूण असहाय तर्कों के अलावा सीता के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं रह जाता। गर्भवती होने के बावजूद भी सीता के निर्वासन का लोक-निर्णय हो जाता है। लक्ष्मण रोती-कलपती सीता को तमसा के किनारे छोड़ आते हैं।                   10) आदर्श माता :


निर्वासन के बाद सीता जलसमाधि लेने के बारे में सोचती है। परंतु भीतर बैठी ममत्व की भावना इस आत्मघात से बचाती है। सीता एक साधारण स्त्री की तरह ऋषि वाल्मिकी के आश्रम में रहती है। वह अपने जुड़वाँ पुत्रों (लव-कुश) की सेवा-शुश्रूषा में अपनी जिंदगी गुजार देना चाहती है। वह लव-कुश का अच्छी तरह से पालन-पोषण करती है।


11 ) राम के लोकनिर्णय की शिकार :


लंका की कारागृह से मुक्ति के बाद सीता खुश थी। वह अपने मन में अपने सपने सजाई हुई थी। तभी उसे लोकनिर्णय का शिकार होना पड़ता है। इस घटना से वह दुःखी हो जाती है। उसे निर्वासन की स्थि गुजरना पड़ता है। क्योंकि प्रजा, समाज तथा परिवार का एक भी सदस्य सीता की ओर से बोलने के लिए तैयार नहीं है। राम गुरूजनों और अन्य ऋषियों से परामर्श करके सीता को पुनः वापस लाने का निर्णय वाल्मिकी को सुनाते हैं। इस समय भी सीता के सामने अग्निपरीक्षा का प्रस्ताव रखा जाता है। निर्दोष होने के बावजूद भी सीता को बार-बार लोकनिर्णय का शिकार होना पड़ता है। निर्वासन के समय सीता का मन आकुल होकर उभर आता


“तुमने मेरी सुचिता पर


फिर से संदेह दिखाया


जन-निंदा के माध्यम से अपना सवाल दोहराया।"


निष्कर्ष :


अतः बार-बार प्रताडित भारतीय नारी के अपमान के विरूद्ध सीता का चरित्र एक प्रतीक बनकर हम सामने प्रकट होता है। प्रस्तुत खंडकाव्य सीता के चरित्र के माध्यम से नारी और पुरूष के संबंधों की नई व्याख्या और एक नया समाधान प्रस्तुत करता है। अतः प्रस्तुत खंडकाव्य में सीता के चरित्र से निष्कलंकता, पतिव्रता, विद्रोही, दृढ संकल्पी, आत्मविश्वासी, निर्वासित नारी, आदर्श माता आदि चारित्रिक विशेषताएँ प्रकट होती है।

Wednesday, 30 June 2021

अनुवाद और विज्ञापन स्वरूप, प्रकार, महत्व, उपयोगिता

 

राधानगरी महाविद्यालय, राधानगरी

बी. . I आवश्यक हिंदी

सेमिस्टर III   द्वितीय  सत्र

    प्रा. . एम. कांबले

    हिंदी विभाग

इकाई  - III

अनुवाद और विज्ञापन स्वरूप, प्रकार, महत्व, उपयोगिता 

उद्देश   .  अनुवाद के स्वरूप  . प्रकारो  . महत्व  . उपयोगिता  से  परिचित    होगा  . अनुवाद कार्य के प्रारूप का ज्ञान होगा  . विज्ञापन कार्य के प्रारूप का ज्ञान होगा

प्रस्तावना :— 

आधुनिक युग में शिक्षा केवल ज्ञानार्जन का माध्यम हरकर उपजीविका प्राप्त करने  का साधन बन गयी है | अनुवाद आज जागतिक स्तर पर महत्वपूर्ण बन गयी है , हिंदी पाठ्यक्रम में इस विषय की आवश्यकता, महत्व को ध्यान में रखकर अध्ययन के  लिए रखा है

विषय विवेचन :—

 अंग्रेजी में ट्रान्सलेशन को हिंदी में अनुवाद कहा गया है प्रस्तुत शब्द की व्युत्पत्ति लैटीन शब्द ट्रान्स '  तथा लेशन के योग से हुई है ट्रान्स का अर्थ पार  और लेखन का अर्थ ले जाने की क्रिया अर्थात ट्रान्सलेशन शब्द का अर्थ पार ले जाने की क्रिया परिभाषा डॉ. भोलानाथ तिवारी " एक भाषा में व्यक्त विचारों को यथासंभव समान और सहज अभिव्यक्ति द्वारा दूसरी भाषा में व्यक्त करने का प्रयास ही अनुवाद है। 

अनुवाद के प्रकार : -  अध्ययन के लिए  ) कथानुवाद  ) काव्यनुवाद  ) नाट्यानुवाद

कथानुवाद : - स्रोत् (मुल) भाषा की कथा लक्ष भाषा में कथात्मक अनुवाद कथानुवाद कहा जाता है।  कहानी, लघुकथा  उपन्यास आदि का अनुवाद किया जाता है| अनुवाद में मूल भाषा की गदिमा को ध्यान में लेकर अनुवाद आवश्यक होता है।

) काव्यानुवाद : - काव्य रचनाओं का अनुवाद काव्यानुवाद कहा जाता है।  काव्यानुवाद पद्य का मुक्त छंद के साथ गद्य में भी किया जाता     है।  काव्यानुवाद में बिंब, काव्य सौंदर्य एवं शैली विशेषण की पुनर्रचना करनी होती है। 

 ) नाट्यानुवाद  :- नाटक का अनुवाद रगमंचीय भूमि का   ध्यान में लेकर किया जाता है।  प्रेमचंद के उपन्यासौं  का नाट्यानुवाद किया गया, मन्नू भंडारी ने अपने महाभोज उपन्यास का नाट्यनुवाद किया था। इसके लिए रंगमंच की पूरी जानकारी एव नाट्य तत्वों का अनुवाद करना आता होता हैं।

) प्रयोजन के आधात्पर अनुवाद के प्रकार, मानवी जीवन में अनुवाद विभिन्न उद्देशों को अनुवाद  ) वैज्ञानिक तकनीकी अनुवाद  ) संचारमाध्यम के अनुवाद  )   अनुवाद ) विज्ञापन के अनुवाद

) कार्यालयीन अनुवाद  :-  कार्यालयिन अनुवाद में स्त्रोत (मूल ) भाषा की कार्यालय संबंधी सामग्री को लक्ष्य भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।  जैसे सरकारी पत्र, परिचय, सूचनाएँ, अधिसूचना  नियम, परनियम, प्रेस विज्ञानं, आलेखन, टिप्पणी, प्रतिवदेन, तार, प्रमाणपत्र आवेदन पत्र संसदीय अधिवेशन आदि

)   प्रयोजन के आधात्पर अनुवाद के प्रकार, मानवी जीवन में अनुवाद विभिन्न उद्देशों को अनुवाद  ) वैज्ञानिक तकनीकी अनुवाद  ) संचारमाध्यम के अनुवाद  )   अनुवाद ) विज्ञापन के अनुवाद

) कार्यालयीन अनुवाद  :-  कार्यालयिन अनुवाद में स्त्रोत (मूल ) भाषा की कार्यालय संबंधी सामग्री को लक्ष्य भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।  जैसे सरकारी पत्र, परिचय, सूचनाएँ, अधिसूचना  नियम, परनियम, प्रेस विज्ञानं, आलेखन, टिप्पणी, प्रतिवदेन, तार, प्रमाणपत्र आवेदन पत्र संसदीय अधिवेशन आदि

) वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुवाद :- भौतिक, रसायन, जीव प्राणी, वनस्पति, पर्यावरण, गणित, सांख्यिकी संगणक, खगोल, भूगोल, यांत्रिकी, अभियांत्रिकी- भूगर्भ, अवकाश, विज्ञानं का अघिकतर साहित्य अंग्रेजी में या पाश्चात्य भावाओं अनुदित किया जाता है।  यह एक दूसरे देशो के हित रक्षण विज्ञान तकनीक लेन देन के लिए अनुवाद महत्त्वपूर्ण है। 

) मानविकी अनुवाद :- सामाजिक शास्त्र शाबा से जुड़े विषयों से संबंधित है।  समाजशास्त्र, राज्यशास्त्र, इतिहास, मनोविज्ञान, भाषाविज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, मराठी या विभिन्न प्रांतीय भाषाएँ शिक्षा अनुसंधान, सर्वेक्षण, परियोजना, मातृभाषा आदि के लिए अनुवाद आवश्यक हो गया है। 

) संचार माध्यम अनुवाद :- एक भाषा के संचार माध्यमो की सामग्री दूसरी भाषा में अनुदित करना संचार माध्यम अनुवाद कहा जाता है वर्तमान युग में संचार माध्यमों ने देश विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।  पत्र, पत्रिकाएँ दूरदर्शन, आकाशवाणी, संगणक, ईंटरनेट, राजनीती, खेल, व्यापार, विज्ञानं साहित्य, जीवन से संबंधित सभा विषयों के लिए अनुवाद अनिवार्य हो गया है।

) विज्ञापन अनुवाद :- समाचारपत्र, दूरसंचार , आकाशवाणी, संगणक, ईंटरनेट आदी विज्ञापन प्रभावी माध्यम बना है. स्त्रोत भाषा के विज्ञापन का लक्ष्य भाषा में अनुवाद करना विज्ञापन अनुवाद कहा  जाता हे  . विज्ञापन ग्राहकोंको आकर्षित करने के लिए वस्तुओं का विशेष रूप से जानकारी देकर उन्हें आकर्षित करने की कला विज्ञापन में होती हैं।   

) प्रकृति के आधारपर अनुवाद

) शब्दानुवाद : अनुवाद में हर शब्द का महत्व होता है उसका विशेष महत्व होता है तब हर शब्दानुवाद। .... जाता है।  शब्दानुवाद के तीन भेद है

. शब्द प्रतिशब्द अनुवाद ) शब्दक्रम मुक्त अनुवाद ) शाब्दिक शब्दानुवाद

) शब्द प्रतिशब्द अनुवाद : इस अनुवाद में स्त्रोत भाषा के वाक्योमें शब्द का जो क्रम होता है उसी क्रम से अनुवाद किया जाता हैं  उदा.

 

वह है जा रहा पाठशाला        मैं  हूँ खा रहा आम

) शब्द क्रम मुक्त अनुवाद  : इसमें शब्दों के क्रमानुसार अनुवाद नहीं किया जाता किंतु मूल के प्रतिक शब्द का अनुवाद किया जाता है।  अंग्रेजी अखबारो से हिंदी अखबारों में किए अनुवाद जैसी होती है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इकाई - II  अनुवाद स्वरूप : संक्षेप में परिचय

प्रास्ताविक :

अनुवाद एक कला है।  एक भाषा की सामग्री को दूसरी भाषा में उसी भावों के अनुरूप ले जाना, जो पहली भाषा में भाव हैं, उसे अनुवाद कहा जाता है।  अनुवाद करते समय अनुवादक को दो भाषाओं  का प्रचुर मात्रा में ज्ञान होना आवश्यक होता है।  अनुवाद में मूल सामग्री निहित भाव, विचार , आशय, विषय, भाषा - सौष्टव और शैली आदि सभी बातों का महत्त्व रहता है।  मूल सामग्री के इन बातों में बदलाव नहीं होना चाहिए।  जिस भाषा की सामग्री का अनुवाद किया जाता है।  उसे मुल भाषा या स्त्रोत भाषा कहा जाता है उसे दिवतीय भाषा अथवा लक्ष्य भाषा कहा जाता है।  इस प्रकार स्त्रोत भाषा की सामग्री लक्ष्य भाषा में परिवर्तित करना ही अनुवाद कहलाता है।

उदाहरण 1. मराठी परिच्छेद

आपल्या देशात धर्माची, संप्रदायांची अनेक उपासना गृहे, मंदिरे, मशीदी , चर्च आणि गुरुद्वारे आहेत. सर्वांनाच शांती हवीय. पण शांतीचे दर्शन कुठेच होत नाही. सर्वत्र कोणते कोणते आंदोलन छेडलेले आहे. दगड, सीमेंट, चुनयापासून बनलेल्या या भव्य पवित्र स्थानांतुन माणसाच्या नैतिकतेला बल का मिळत नाहिय धार्मिक स्थानातून नैतिकता आणि शांतीचा संदेश प्रसारित होण्याची आवश्यकता आहे .  वैचारिक क्रांती, सात साहित्य आणि चारित्र्यनिर्मितीची आज आम्हाला या धार्मिक क्षेत्रात आवश्यकता आहे .

हिंदी अनुवाद :

हमारे देश में धर्मों - सम्प्रदायों के अनेक उपासना गृह, मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर और गुरुद्वारे हैं।  सभी शांति कहते हैं, पर शांति के दर्शन कहीं नहीं होते।  हर जगह कोई कोई आंदोलन छिड़ा है।  पत्थर, सीमेंट, चुने से बने इन भव्य पवित्र स्थानों से मनुष्य की नैतिकता को बल क्यों नहीं मिलताजरूरत इसकी हे की इन धार्मिक स्थानों से नैतिकता  और शांति का संदेश प्रसारित हो।  हमें आज धार्मिक क्षेत्र में आवश्यकता है वैचारिक क्रांति को, सत साहित्य एव चरित्र निर्माण की।

उदाहरण . मराठी परिच्छेद

आपल्यापाशी बुद्धिमत्ता आहे पण कर्मशीलता नाही . आपल्यापाशी वेदान्त तत्वज्ञान आहे, परंतु ते व्यवहारात उतरविण्याचे सामर्थ्य आपल्यात नाही. आपल्या धर्मग्रंथातून वैश्विक समतेचा सिद्धांत प्रतिपादिलेला आहे, परंतु 

 

 

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